curl --location -g --request PUT 'https://api.adx1.com/api/campaign/{{campaign_id}}?api_key={{api_key}}' \ --header 'Content-Type: application/x-www-form-urlencoded' \ --data-urlencode 'Campaign[active]=0' चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बलात्‍कारी से पूछ रहे हैं कि क्‍या तुम उस लड़की से शादी करोगे, जिसका तुमने रेप किया है. – NEWS INDIA POST
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बलात्‍कारी से पूछ रहे हैं कि क्‍या तुम उस लड़की से शादी करोगे, जिसका तुमने रेप किया है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बलात्‍कारी से पूछ रहे हैं कि क्‍या तुम उस लड़की से शादी करोगे, जिसका तुमने रेप किया है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बलात्‍कारी से पूछ रहे हैं कि क्‍या तुम उस लड़की से शादी करोगे, जिसका तुमने रेप किया है.

इस देश के सब मर्दों के लिए संदेश ये है कि “शादी रेप करने का लाइसेंस है”

शादी बलात्‍कार का लाइसेंस नहीं है, न ही कोई मरहम, जिसे लगाकर इस घाव को भरा जा सकता है. बलात्‍कार एक अपराध है और जैसे हर अपराध की सजा होती है, इस अपराध की भी होनी चाहिए. इस देश की कोई लड़की एक बलात्‍कारी पति नहीं डिजर्व करती.


    मनीषा पांडेय

The Chief Justice of India is asking the rapist if you will marry the girl whom you have raped.

The message for all the men of this country is that “marriage is a license to rape”

Marriage is not a license for rape, nor any ointment, which can be healed by applying this wound. Rape is a crime and as every crime is punished, so should this crime. No girl in this country deserves a rapist husband.

 

केस पॉक्‍सो का था. एक 23 साल के आदमी ने एक 16 साल की लड़की का बलात्‍कार किया था. लड़की नौवीं कक्षा में पढ़ती थी. आदमी उसका दूर का रिश्‍तेदार लगता था और उससे शादी करना चाहता था. वह रोज स्‍कूल के रास्‍ते में उसका पीछा करता था. लड़की ने उसका प्रेम प्रस्‍ताव मानने से इनकार किया तो एक दिन मौका देखकर वो उसके घर में घुस गया. उस वक्‍त घर के बाकी लोग कहीं बाहर गए हुए थे और लड़की घर में अकेली थी. उसने लड़की को बांधकर, उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसके साथ रेप किया.
ये सिर्फ एक बार की कहानी नहीं थी. उस आदमी ने लड़की को डरा-धमकाकर कई बार उसके साथ बलात्‍कार किया. उसने अपना मुंह खोलने पर लड़की को जान से मार डालने, एसिड से उसका मुंह जला देने, उसे जिंदा जला देने और उसके भाई को जान से मार डालने की धमकी दी. जब लड़की को उससे बचने का कोई और रास्‍ता नहीं सूझा तो उसने आत्‍महत्‍या करने की कोशिश की.

तब कहीं जाकर लड़की की मां को पता चला कि उसके साथ क्‍या हो रहा था. मां ने लड़की को मरने से बचा लिया और दोनों पहुंची पुलिस के पास. पुलिस थाने में आरोपी की मां ने यह कहकर अपने बेटे को बचाने की कोशिश की कि जब वो 18 साल की हो जाएगी तो लड़का उससे शादी कर लेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. लड़की के बालिग होने पर लड़के ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया.
तब मां ने उस आदमी के खिलाफ कोर्ट में रेप का मुकदमा दायर किया.

यह तो उस लड़की की कहानी है. ये कहानी कुछ और भी हो सकती थी. उसके बाकी डीटेल चाहे जो भी होते, मूल बात ये थी कि एक 23 साल के आदमी ने एक 16 साल की लड़की के साथ जबर्दस्‍ती रेप किया, उसे डराया, धमकाया और आत्‍महत्‍या के लिए उकसाया.

मामला अभी निचली अदालत में है. जब निचली अदालत ने अभियुक्‍त की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी तो हाईकोर्ट में अपील की गई. हाईकोर्ट ने पिछले फैसले को रद्द कर गिरफ्तारी का आदेश दिया. उसके फैसले के खिलाफ अभियुक्‍त ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस शरद बोबडे इस मामले की सुनवाई कर रहे थे.
इस सुनवाई के दौरान कोर्ट में जो बात हुई, वो चकित तो नहीं करती, लेकिन डराती जरूर है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने अभियुक्‍त से पूछा, “क्या तुम रेप पीड़िता से शादी करोगे.” माननीय मुख्‍य न्‍यायाधीश ने आगे कहा, “लड़की के साथ छेड़खानी और रेप करने से पहले आपको सोचना चाहिए था कि आप एक सरकारी कर्मचारी हैं.”

माननीय मुख्‍य न्‍यायाधीश बोबडे ने आगे कहा, “हम तुम पर शादी के लिए कोई दबाव नहीं डाल रहे हैं, लेकिन ये बताओ कि तुम शादी करना चाहते हो या नहीं, वरना तुम कहोगे कि हमने तुम्‍हारे ऊपर शादी के लिए दबाव डाला.”

न्‍यायाधीश के इस सवाल पर अभियुक्‍त के वकील ने कहा कि वो अपने मुवक्किल यानी याचिकाकर्ता से पूछकर जवाब देंगे.
इसके पहले अभियुक्‍त ने कहा था कि पहले वो उस लड़की से शादी करना चाहता था, लेकिन अब नहीं कर सकता क्‍योंकि वो शादीशुदा है.

देश की राजधानी दिल्‍ली के सर्वोच्‍च न्‍यायालय के भीतर भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस. बोबडे और अभियुक्‍त के बीच हुआ यह संवाद है.

एक 16 साल की लड़की के साथ रेप हुआ है. मामला इसलिए भी ज्‍यादा संवेदनशील है क्‍योंकि लड़की नाबालिग है. केस पॉक्‍सो का है. और एक इतने गंभीर और संजीदा मामले में भरी अदालत में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बलात्‍कारी से पूछ रहे हैं कि क्‍या तुम उस लड़की से शादी करोगे, जिसका तुमने रेप किया है.

मानो शादी वो पवित्र जल है, जिसे छिड़क देने से सारे पाप धुल जाते हैं. शादी सब अपराधों से निजात पाने का कोई सर्टिफिकेट है. बलात्‍कारी शादी करके गिरफ्तारी से लेकर सजा तक से मुक्ति पा सकता है.

ये बातें इसलिए भी ज्‍यादा गंभीर हैं क्‍योंकि ये एक ऐसे व्‍यक्ति के द्वारा कही जा रही हैं, जिसका काम कानून का पालन करना, हमारे संवधौनिक अधिकारों की सही व्‍याख्‍या करना, उन्‍हें सुनिश्चित करना और हर विक्टिम को न्‍याय देना है. जब सबसे जिम्‍मेदार पद पर बैठा कोई व्‍यक्ति गैरजिम्‍मेदार बात करता है तो उसका असर नीचे तक होता है. भारत में औरतों की चुप्‍पी सदियों पुरानी है, लेकिन उनका बोलना नया है.

ये तो अब हो रहा है कि इतनी सारी महिलाओं ने अपने साथ हो रही हिंसा और रेप के खिलाफ मुंह खोलना और आवाज उठाना शुरू किया है. वरन रेप तो पहले भी होते थे, लेकिन घर की इज्‍जत के नाम पर लड़की का ही मुंह बंद कर दिया जाता था.

जस्टिस बोबडे के इस कथन का सोशल वर्ल्‍ड से लेकर रीअल वर्ल्‍ड तक में काफी विरोध हो रहा है. तकरीबन 4 हजार बुद्धिजीवियों और महिला एक्टिविस्‍टों ने चीफ जस्टिस के नाम एक खुला खत लिखा है. उसकी लेटर में कही गई कुछ प्रमुख बातें इस प्रकार हैं-

माननीय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया,

1- हम भारत के महिला आंदोलनों, प्रगतिशील आंदोलनों के प्रतिनिधि और जिम्‍मेदार नागरिक हैं. 1 मार्च, 2021 को मोहित सुभाष चव्‍हाण बनाम स्‍टेट ऑफ महाराष्‍ट्र केस में आपके द्वारा की गई टिप्‍पणियों से हमें बहुत आघात पहुंचा है. हम और आहत और गुस्‍से में हैं.

2- आप एक ऐसे केस की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें एक आदमी पर स्‍कूल जाने वाली नाबालिग बच्‍ची का पीछा करने, उसे बांधकर, उसका मुंह बंद करके उसके साथ जबर्दस्‍ती रेप करने, उसे डराने, धमकाने, उस पर एसिड फेंकने, उसे जिंदा जला देने और जान से मार डालने की धमकी देने का आरोप है. आपने उस व्‍यक्ति से कोर्ट में पूछा कि क्‍या वह उस लड़की से शादी करेगा. ऐसा कहकर आप उस बच्‍ची को एक ऐसे आदमी के साथ जीवन भर के बलात्‍कार के रिश्‍ते में ढकेल रहे थे, जिसकी वजह से उसने आत्‍महत्‍या करने की कोशिश की.

3- यह बात हमें आक्रोश से भर देती है कि भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश, एक ऐसा शख्‍स, जिसका काम भारत के संविधान की व्‍याख्‍या करना और न्‍याय को सुनिश्चित करना है, को भी यह समझाने की जिम्‍मेदारी हम औरतों के सिर पर है कि सिडक्‍शन, बलात्‍कार और विवाह में क्‍या फर्क है.

4- रेप के केस को सुलझाने के लिए बलात्‍कार का शिकार हुई एक नाबालिग लड़की के लिए विवाह का सुझाव देना एक क्रूर और असंवेदनशील बात है और यह लड़की के न्‍याय के अधिकार का भी हनन है.

5- हमारे देश में महिलाएं ऐसे लोगों से आक्रांत हैं, जो बलात्‍कार होने पर आरोपी को विक्टिम से शादी कर लेने का सुझाव देते हैं.

6- भारत की महिलाओं को आज भी ताकतवर और जिम्‍मेदार पदों पर बैठे लोगों के पितृसत्‍तात्‍मक रवैए का सामना करना पड़ रहा है, जो बलात्‍कार जैसे अपराध के लिए शादी कर लेने का सुझाव देते हैं.

7- अब बहुत हो गया. आपके शब्‍द न्‍यायालय की जिम्‍मेदारी और उसकी गरिमा को कमतर करने वाले हैं. भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश के मुंह से निकले इन शब्‍दों से निचली अदालतों, पुलिस और न्‍याय करने वाली अन्य एजेंसियों तक ये संदेश पहुंच रहा है कि इस देश में न्‍याय महिलाओं का संवैधानिक अधिकार नहीं है. इसका आगे नतीजा यही होगा कि लड़कियों और औरतों और चुप हो जाएंगी. वह चुप्‍पी, जिसे तोड़ने में हमें सदियों लगे. साथ ही आप बलात्‍कारी को ये संदेश दे रहे हैं कि शादी रेप का लाइसेंस है.

8- हम चाहते हैं कि आप 1 मार्च 2021 को कोर्ट में कहे गए अपने शब्‍दों को वापस लें.

उम्‍मीद है, मुख्‍य न्‍यायाधीश इस पत्र में लिखी बातों को गंभीरता से लेंगे और अपने कहे शब्‍द वापस लेंगे. शादी बलात्‍कार का लाइसेंस नहीं है, न ही कोई मरहम, जिसे लगाकर इस घाव को भरा जा सकता है. बलात्‍कार एक अपराध है और जैसे हर अपराध की सजा होती है, इस अपराध की भी होनी चाहिए.

इस देश की कोई लड़की एक बलात्‍कारी पति नहीं डिजर्व करती.

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